Thursday, July 28, 2016

ख़ुदा मिला

ढूंढा जहाँ पे वहाँ मिला
कभी मुझमे , कभी उसमे मिला
खुद को ढूंढता रहता था खुद में
पता नहीं क्यूँ , जहाँ  खोजा, ख़ुदा मिला ||



4 comments:

  1. bahut badiya lage raho likhte raho

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  2. kya baat hai haseen bahut hi haseen sher hai

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  3. gyaan ki koi seema nahi bantte raho daba kar mat rakho

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कुछ कहिये

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